उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार सुबह फिर एक बार बर्फबारी शुरू हो गई। उधर, कश्मीर घाटी में भी रुक-रुककर हिमपात हो रहा है। जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे बंद होने से उधमपुर में पांच दिन से 2000 वाहन फंसे हुए हैं। ताजा बर्फबारी और बारिश की वजह से मैदानी इलाकों में शीत-लहर शुरू हो गई है।
उत्तराखंड : राज्य में गुरुवार रात से बर्फबारी हो रही है। करीब आधा केदारनाथ मंदिर बर्फ में ढंक गया है। पर्यटक स्थल मुनस्यारी में करीब डेढ़ फीट मोटी बर्फ की परत जमा हो गई है। चौबीस घंट में ही आधा फीट बर्फ गिरी है। इनके अलावा मसूरी, जोशीमठ, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, नंदा घुंघटी, खिर्सू औली, गोरसों, नैनीताल, पिंडर, शामा, धानाचूली और रानीखेत के चौबटिया में भी ताजा बर्फबारी हुई है। रुद्रपयाण जिले में बारिश हुई है।
हिमाचल : लाहौल घाटी, शिमला, चंबा, डलहौजी, मंडी और कुल्लू् में बर्फबारी फिर शुरू हो गई है। यहां गुरुवार को पारा माइनस 1.1 डिग्री रहा। इससे डलहौजी में 10 सेमी और कल्पा में 14.1 सेमी हिमपात हुआ है। बर्फबारी की वजह से राज्य में अभी भी 518 सड़कें बंद हैं। दो दिन पहले तक यहां 590 सड़कें बंद थीं। इनमें से 170 सड़कों को खोल दिया गया है। सिस्सू, तिंदू और याचे समेत 10 से ज्यादा गांवों में बिजली और इंटरनेट बंद हैं।
कश्मीर : श्रीनगर में जबरदस्त ठंड है। यहां गुरुवार को पारा माइनस 1.7 डिग्री रहा। जम्मू-कश्मीर यातायात पुलिस के सीनियर एसपी मुजफ्फर अहमद शाह ने बताया कि जवाहर सुरंग के पास एवलांच (हिमस्खलन) के बाद मलबे को हटा दिया गया है, लेकिन फिसलन से राजमार्ग बंद है। कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाला मुगल रोड भी बंद है।
दिल्ली : यहां गुरुवार रात हुई तेज बारिश की वजह से ठंड बढ़ी है। शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में कोहरे की वजह से 11 ट्रेनें देरी से चल रही हैं। इलाके में अगले चार दिन तक घना कोहरा छाने का अनुमान है।
मध्यप्रदेश : बैतूल जिले में गुरुवार को कई जगह ओले गिरे, छिंदवाड़ा में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे फसलें तबाह हो गई हैं। भोपाल में गुरुवार को घना कोहरा छाया रहा, लेकिन शुक्रवार को इससे कुछ राहत मिली। हालांकि, सर्द हवाओं ने मुश्किल बढ़ा दी है। होशंगाबाद, हरदा, विदिशा, रायसेन और गुना में भी कोहरा छाया रहा।
बिहार : राज्य में कई इलाकों में शुक्रवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। जमुई में बिजिबिलिटी कम होने की वजह से हादसा हो गया। यहां रात में पेट्रोलिंग के दौरान ढांड गांव के पास जमुई-लखीसराय रोड पर पुलिस की जीप पलट गई। पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
Friday, January 25, 2019
Thursday, January 17, 2019
पेटदर्द-बुखार जैसी बीमारियों की 80 दवाएं बैन, 15 साल से बिना मंजूरी बिक रही थीं
नई दिल्ली (पवन कुमार). बाजार में करीब 15 साल से पेटदर्द, बुखार, ब्लड प्रेशर और अनिद्रा जैसी बीमारियों की 80 दवाएं ऐसी हैं, जिन्हें बनाने या बेचने की अनुमति केंद्र सरकार से नहीं ली गई थी। इन दवाओं को बनाने के लिए कंपनियों ने सिर्फ ज्य सरकारों से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और राज्यों ने मंजूरी दे दी थी। अब ये दवाएं बैन होने जा रही हैं।
11 जनवरी से लागू हुआ बैन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाएं बैन करने का गजट नोटिफिकेशन 11 जनवरी को छपने के लिए भेज दिया था। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन दवाओं पर बैन उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। ये दवाएं दूसरी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सॉल्ट से मिलकर बनाई जा रही हैं। इन्हें सेहत के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के एक अफसर ने बताया कि नई दवा को बाजार में लाने के लिए सबसे पहले सीडीएससीओ से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति देने से पहले सीडीएससीओ उस दवा की क्वालिटी और शरीर पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करती है। लेकिन, इन 80 दवाओं को बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई। स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ने अपने स्तर पर कंपनियों को मंजूरी दे दी। यह बात अब सामने आई है।
जिन दवाओं पर बैन लगा, उन्हें ये कंपनियां बेच रहीं
इन्टास, एबॉट, एरिस्टो, एल्केम, सिप्ला, मैनकाइंड जैसी कई कंपनियां इस तरह की फिक्स डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाएं बना रही हैं। इनमें कई छोटी कंपनियां भी हैं, जो अलग-अलग बीमारियों की दवाओं को कंबाइन कर एक टैबलेट बना रही हैं, ताकि अलग-अलग दवाएं न बनानी पड़ें।
विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध, भारत में ढील
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध है। सिर्फ भारत जैसे कुछ विकाससील देशों में इस मामले में काफी ढील बरती जाती रही है।
अमूल ने फर्जी विज्ञापन के मामले में गूगल इंडिया को कानूनी नोटिस भेजा है। उसने पुलिस से भी शिकायत की है। कंपनी कहना है कि कुछ संस्थाएं और व्यक्ति अमूल की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर गूगल पर फर्जी विज्ञापन देकर ठगी कर रहे हैं। अमूल ने बुधवार को यह जानकारी दी।
कुछ लोगों से ठगों ने 3 से 6 लाख रु तक लिए: अमूल
अमूल का कहना है कि गूगल पर अमूल फ्रेंचाइजी, अमूल पार्लर और अमूल डिस्ट्रीब्यूटर की-वर्ड डालने पर फर्जी लिंक आ जाते हैं। इन पर क्लिक करने पर लोगों से फॉर्म भरवाया जाता है। उसके बाद कॉल कर रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 25,000 से 5 लाख रुपए तक मांगे जाते हैं। पैसे मिलने के बाद लोगों से संपर्क बंद कर दिया जाता है।
अमूल के एमडी आरएस सोढ़ी का कहना है कि फर्जी विज्ञापनों के शिकार कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है। कुछ लोग ऐसे हैं जो ठगों के झांसे में आकर 3 से 6 लाख रुपए तक का भुगतान कर चुके हैं।
अमूल ने गूगल से फर्जी विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही अपील की गई है कि बड़ी कंपनियों से संबंधित पेड ऐड लेने से पहले विज्ञापन देने वाले की जांच-पड़ताल की जानी चाहिए। यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस बारे में गूगल का क्या कहना है।
11 जनवरी से लागू हुआ बैन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाएं बैन करने का गजट नोटिफिकेशन 11 जनवरी को छपने के लिए भेज दिया था। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन दवाओं पर बैन उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। ये दवाएं दूसरी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सॉल्ट से मिलकर बनाई जा रही हैं। इन्हें सेहत के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के एक अफसर ने बताया कि नई दवा को बाजार में लाने के लिए सबसे पहले सीडीएससीओ से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति देने से पहले सीडीएससीओ उस दवा की क्वालिटी और शरीर पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करती है। लेकिन, इन 80 दवाओं को बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई। स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ने अपने स्तर पर कंपनियों को मंजूरी दे दी। यह बात अब सामने आई है।
जिन दवाओं पर बैन लगा, उन्हें ये कंपनियां बेच रहीं
इन्टास, एबॉट, एरिस्टो, एल्केम, सिप्ला, मैनकाइंड जैसी कई कंपनियां इस तरह की फिक्स डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाएं बना रही हैं। इनमें कई छोटी कंपनियां भी हैं, जो अलग-अलग बीमारियों की दवाओं को कंबाइन कर एक टैबलेट बना रही हैं, ताकि अलग-अलग दवाएं न बनानी पड़ें।
विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध, भारत में ढील
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध है। सिर्फ भारत जैसे कुछ विकाससील देशों में इस मामले में काफी ढील बरती जाती रही है।
अमूल ने फर्जी विज्ञापन के मामले में गूगल इंडिया को कानूनी नोटिस भेजा है। उसने पुलिस से भी शिकायत की है। कंपनी कहना है कि कुछ संस्थाएं और व्यक्ति अमूल की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर गूगल पर फर्जी विज्ञापन देकर ठगी कर रहे हैं। अमूल ने बुधवार को यह जानकारी दी।
कुछ लोगों से ठगों ने 3 से 6 लाख रु तक लिए: अमूल
अमूल का कहना है कि गूगल पर अमूल फ्रेंचाइजी, अमूल पार्लर और अमूल डिस्ट्रीब्यूटर की-वर्ड डालने पर फर्जी लिंक आ जाते हैं। इन पर क्लिक करने पर लोगों से फॉर्म भरवाया जाता है। उसके बाद कॉल कर रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 25,000 से 5 लाख रुपए तक मांगे जाते हैं। पैसे मिलने के बाद लोगों से संपर्क बंद कर दिया जाता है।
अमूल के एमडी आरएस सोढ़ी का कहना है कि फर्जी विज्ञापनों के शिकार कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है। कुछ लोग ऐसे हैं जो ठगों के झांसे में आकर 3 से 6 लाख रुपए तक का भुगतान कर चुके हैं।
अमूल ने गूगल से फर्जी विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही अपील की गई है कि बड़ी कंपनियों से संबंधित पेड ऐड लेने से पहले विज्ञापन देने वाले की जांच-पड़ताल की जानी चाहिए। यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस बारे में गूगल का क्या कहना है।
Wednesday, January 9, 2019
आरक्षण पर एक्टिव हुआ HRD मंत्रालय, कॉलेजों में मिलेगा कोटा, बढ़ेंगी 10 लाख सीटें!
सामान्य वर्ग के 'आर्थिक रूप से कमजोर' को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए संविधान में लाया गया संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है. सामान्य वर्ग को आरक्षण देने वाले इस बिल के पास होने के बाद अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शैक्षिक संस्थानों में इसे लागू करने के कई कदम उठाने होंगे. अब मंत्रालय भी आरक्षण लागू करने की रूपरेखा पर काम कर रहा है.
बताया जा रहा है कि मंत्रालय अब इस पर काम कर रहा है कि इस आरक्षण को लागू करने के लिए शैक्षिक संस्थानों में कितनी सीटों को बढ़ाने की जरुरत है. सूत्रों का कहना है कि 'अभी इस बात को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है कि आरक्षण कैसे लागू किया जाएगा. हालांकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से मान्यता हासिल सभी यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थान चाहे वे सरकारी हो या निजी उन्हें आरक्षण लागू करना होगा.
सामान्य आरक्षण: यूं ही नहीं चला BJP ने ब्रह्मास्त्र, इन आंकड़ों पर मोदी की नजर
वहीं यह भी बताया जा रहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम जैसे अन्य प्रतिष्ठित उच्च शैक्षिक संस्थानों समेत देशभर में संस्थानों में करीब 10 लाख सीटें बढ़ानी होगी. उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार, देश में कुल 903 विश्वविद्यालय, 39000 से अधिक कॉलेज और 10,000 से अधिक संस्थान हैं.
स्पेशल रिपोर्ट: 10% आरक्षण से मोदी जीतेंगे 2019 का रण?
बता दें कि लोकसभा में बिल पर कुल 326 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें से 323 ने संशोधन का समर्थन किया, जबकि 3 सांसदों ने बिल का विरोध किया. यानी सवर्णों को आरक्षण देने वाला संशोधन बिल लोकसभा में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत से पास हो गया. अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल के पास होने के बाद आरक्षण का दायरा करीब 60 फीसदी हो जाएगा.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर पदों के लिए भर्ती निकाली है, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत आज से होने जा रही है. भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस भर्ती के माध्यम से नियमित और कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. अगर आप भी इस भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक हैं और इन पदों के योग्य हैं तो आप आवेदन करने की आखिरी तारीख से पहले अप्लाई कर सकते हैं.
कैसे करें अप्लाई?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर करियर पेज में अप्लाई करना होगा. यहां भर्ती से जुड़ा लिंक होगा, जिसके माध्यम से उम्मीदवार अप्लाई कर सकेंगे. साथ ही उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए रिज्यूमे, आईडी प्रूफ, एज, एजुकेशनल क्वालीफिकेशन, अनुभव संबंधी दस्तावेज देने होंगे.
बताया जा रहा है कि मंत्रालय अब इस पर काम कर रहा है कि इस आरक्षण को लागू करने के लिए शैक्षिक संस्थानों में कितनी सीटों को बढ़ाने की जरुरत है. सूत्रों का कहना है कि 'अभी इस बात को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है कि आरक्षण कैसे लागू किया जाएगा. हालांकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से मान्यता हासिल सभी यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थान चाहे वे सरकारी हो या निजी उन्हें आरक्षण लागू करना होगा.
सामान्य आरक्षण: यूं ही नहीं चला BJP ने ब्रह्मास्त्र, इन आंकड़ों पर मोदी की नजर
वहीं यह भी बताया जा रहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम जैसे अन्य प्रतिष्ठित उच्च शैक्षिक संस्थानों समेत देशभर में संस्थानों में करीब 10 लाख सीटें बढ़ानी होगी. उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार, देश में कुल 903 विश्वविद्यालय, 39000 से अधिक कॉलेज और 10,000 से अधिक संस्थान हैं.
स्पेशल रिपोर्ट: 10% आरक्षण से मोदी जीतेंगे 2019 का रण?
बता दें कि लोकसभा में बिल पर कुल 326 सांसदों ने मतदान किया, जिनमें से 323 ने संशोधन का समर्थन किया, जबकि 3 सांसदों ने बिल का विरोध किया. यानी सवर्णों को आरक्षण देने वाला संशोधन बिल लोकसभा में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत से पास हो गया. अब यह बिल राज्यसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल के पास होने के बाद आरक्षण का दायरा करीब 60 फीसदी हो जाएगा.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने स्पेशलिस्ट कैडर ऑफिसर पदों के लिए भर्ती निकाली है, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत आज से होने जा रही है. भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर इन भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे. इस भर्ती के माध्यम से नियमित और कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. अगर आप भी इस भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक हैं और इन पदों के योग्य हैं तो आप आवेदन करने की आखिरी तारीख से पहले अप्लाई कर सकते हैं.
कैसे करें अप्लाई?
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर करियर पेज में अप्लाई करना होगा. यहां भर्ती से जुड़ा लिंक होगा, जिसके माध्यम से उम्मीदवार अप्लाई कर सकेंगे. साथ ही उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए रिज्यूमे, आईडी प्रूफ, एज, एजुकेशनल क्वालीफिकेशन, अनुभव संबंधी दस्तावेज देने होंगे.
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