Thursday, January 17, 2019

पेटदर्द-बुखार जैसी बीमारियों की 80 दवाएं बैन, 15 साल से बिना मंजूरी बिक रही थीं

नई दिल्ली (पवन कुमार). बाजार में करीब 15 साल से पेटदर्द, बुखार, ब्लड प्रेशर और अनिद्रा जैसी बीमारियों की 80 दवाएं ऐसी हैं, जिन्हें बनाने या बेचने की अनुमति केंद्र सरकार से नहीं ली गई थी। इन दवाओं को बनाने के लिए कंपनियों ने सिर्फ ज्य सरकारों से लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और राज्यों ने मंजूरी दे दी थी। अब ये दवाएं बैन होने जा रही हैं।

11 जनवरी से लागू हुआ बैन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाएं बैन करने का गजट नोटिफिकेशन 11 जनवरी को छपने के लिए भेज दिया था। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन दवाओं पर बैन उसी दिन से प्रभावी माना जाएगा। ये दवाएं दूसरी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले सॉल्ट से मिलकर बनाई जा रही हैं। इन्हें सेहत के लिए गंभीर खतरा माना जाता है।

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के एक अफसर ने बताया कि नई दवा को बाजार में लाने के लिए सबसे पहले सीडीएससीओ से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति देने से पहले सीडीएससीओ उस दवा की क्वालिटी और शरीर पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करती है। लेकिन, इन 80 दवाओं को बनाने के लिए अनुमति नहीं ली गई। स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ने अपने स्तर पर कंपनियों को मंजूरी दे दी। यह बात अब सामने आई है।

जिन दवाओं पर बैन लगा, उन्हें ये कंपनियां बेच रहीं

इन्टास, एबॉट, एरिस्टो, एल्केम, सिप्ला, मैनकाइंड जैसी कई कंपनियां इस तरह की फिक्स डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाएं बना रही हैं। इनमें कई छोटी कंपनियां भी हैं, जो अलग-अलग बीमारियों की दवाओं को कंबाइन कर एक टैबलेट बना रही हैं, ताकि अलग-अलग दवाएं न बनानी पड़ें।

विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध, भारत में ढील

आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल का कहना है कि विकसित देशों में ऐसी दवाएं बनाना अपराध है। सिर्फ भारत जैसे कुछ विकाससील देशों में इस मामले में काफी ढील बरती जाती रही है।

अमूल ने फर्जी विज्ञापन के मामले में गूगल इंडिया को कानूनी नोटिस भेजा है। उसने पुलिस से भी शिकायत की है। कंपनी कहना है कि कुछ संस्थाएं और व्यक्ति अमूल की डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिलाने के नाम पर गूगल पर फर्जी विज्ञापन देकर ठगी कर रहे हैं। अमूल ने बुधवार को यह जानकारी दी।

कुछ लोगों से ठगों ने 3 से 6 लाख रु तक लिए: अमूल
अमूल का कहना है कि गूगल पर अमूल फ्रेंचाइजी, अमूल पार्लर और अमूल डिस्ट्रीब्यूटर की-वर्ड डालने पर फर्जी लिंक आ जाते हैं। इन पर क्लिक करने पर लोगों से फॉर्म भरवाया जाता है। उसके बाद कॉल कर रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 25,000 से 5 लाख रुपए तक मांगे जाते हैं। पैसे मिलने के बाद लोगों से संपर्क बंद कर दिया जाता है।

अमूल के एमडी आरएस सोढ़ी का कहना है कि फर्जी विज्ञापनों के शिकार कई लोगों ने उनसे संपर्क किया है। कुछ लोग ऐसे हैं जो ठगों के झांसे में आकर 3 से 6 लाख रुपए तक का भुगतान कर चुके हैं।

अमूल ने गूगल से फर्जी विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही अपील की गई है कि बड़ी कंपनियों से संबंधित पेड ऐड लेने से पहले विज्ञापन देने वाले की जांच-पड़ताल की जानी चाहिए। यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस बारे में गूगल का  क्या कहना है।

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