Monday, December 31, 2018

चुनावों का साल, वर्ल्ड कप का साल

बीता साल 2018 कई मायनों में यादगार रहा. राजनीति से लेकर फ़िल्म जगत तक में हलचल देखने को मिली.

वहीं, सर्वोच्च न्यायालय ने भी कुछ ऐसे फ़ैसले दिए जिनसे 2018 को बदलाव के साल के रूप में याद किया जाएगा.

कुछ ऐसे पल भी आए जिसने देश को चौंकाया, मसलन जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस, मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं, रफ़ाल में कथित तौर पर भ्रष्टाचार, सीबीआई में अंतर्कलह जैसे मामले.

कई फ़िल्मी हस्तियां शादी के बंधन में बंध गए, उद्योगपति मुकेश अंबानी की बेटी की शादी में बड़े सितारों का जमावड़ा, व्यापार की दुनिया में बैंक फ्रॉड जैसे मामले में भी सामने आए.

अब नज़र नए साल पर है. उम्मीद है कि मंगलवार से शुरू हुआ नया साल देशवासियों के लिए मंगलमय साबित होगा.

ये साल चुनावी घमासान का साल होगा. इस साल देश में लोकसभा चुनाव होंगे. पांच साल बाद होने वाला यह चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की राजनीतिक किस्मत तय करेगा.

साल 2014 में 'मोदी लहर' और 'अच्छे दिन' के वादे के साथ आई सरकार के लिए यह कड़ी परीक्षा का वक़्त होगा, वहीं इस सवाल का भी जवाब तय करेगा कि मोदी का 'विकल्प कौन'?

राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए यह साल भी कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित होगा. उनके सामने नेतृत्व और ग़ैर भाजपा दलों को एक साथ लेकर चलने की चुनौती होगी.

बीता साल 2018 भाजपा और कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनावों के मद्देनजर मिला-जुला रहा. कई राज्यों में कांग्रेस ने सत्ता में आने में कामयाबी रही. कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में पार्टी ने भाजपा को शिकस्त दी. वहीं भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों में जीत का डंका बजाया.

साल 2019 में सात राज्यों में चुनाव होंगे. इनमें हरियाणा, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, महाराष्ट्र, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं.

इस साल मई के महीने में क्रिकेट प्रेमियों पर वर्ल्ड कप का खुमार चढ़ेगा. लगभग डेढ़ महीने चलने वाले इस गेम में 10 देशों की क्रिकेट टीमें शामिल होंगी.

दो बार वर्ल्ड कप जीत चुका भारत तीसरी बार विश्व विजेता बनने के लिए मैदान में उतरेगा. इस सीज़न में भारत अपना पहला मैच 5 जून को दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ खेलेगा.

चुनावी साल में बीजेपी और हिंदुत्व के नाम पर चुनाव लड़ने वाली दूसरी पार्टियों के लिए राम मंदिर का मुद्दा अहम होगा.

मामला सुप्रीम कोर्ट में है और चार जनवरी को इस पर सुनवाई होगी. कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुनवाई में हो रही देरी पर सवाल उठाया गया था.

इधर चुनावों से पहले राम मंदिर पर अध्यादेश लाने की भी मांग हो रही है. ऐसे में ये मामला नए साल में सुर्खियों में बना रह सकता है.

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